श्रीमद्भगवद्गीता के अनमोल वचन। Srimadbhagwadgita Quotes in Hindi.

श्रीमद्भगवद्गीता के अनमोल वचन। Srimadbhagwadgita Quotes in Hindi.

Srimad bhagwadgita quotes in hindi: श्रीमद्भगवद्गीता एक ऐसी book या कह ले एक ऐसी ग्रन्थ है. जिसमे मनुष्य के जीवन का पूरा सार दिया हुआ है. मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक का सफर और उसके बाद के चक्र को श्रीमद्भगवद्गीता में विस्तार से बताया गया है. मनुष्य के सांसारिक मोह-माया से निकलकर मोक्ष की प्राप्ति का ज्ञान गीता में मौजूद है.
श्रीमद्भगवद्गीता जो की एक ऐसी ग्रन्थ है. जिसे पढ़कर कोई भी व्यक्ति इस संसारिक जीवन में सुख और शांति से अपना जीवन व्यतीत कर सकता है और अपने जीवन को सफल बना सकता है। 

महाभारत के युद्ध से पहले भगवान श्री कृष्णा का अर्जुन को दिए उपदेश, हिन्दू धर्म में गीता के नाम से प्रसिद्ध और अति पूज्यनीय ग्रन्थ है. इसके उपदेश बहुत छोटे में ही सम्पूर्ण सृष्टि के सार को समझा देते है और मनुष्य को साक्षात्कार में सहायक है. गीता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी हजारो वर्ष पहले थी. गीता का अध्यन प्रत्येक प्राणी को गहराई से समझ के साथ करने से जीवन के दुखों से मुक्ति मिलती है। 
bhagwad gita krishna photo
-------श्री कृष्णा-----

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----श्री कृष्णा---

संस्कृत में,
  यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। 

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम ||4.7|| 

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम। 

धर्मसंस्थापनाथार्य संभवामि युगे युगे ||4.8|| 
                                --श्रीमद्भगवद्गीता -- श्री कृष्णा 

 हिंदी में,

हे भारत, जब जब अच्छाई की पराजय होती है 

और बुराइयाँ अपना सर उठाती है;

तब संतो की रक्षा के लिए और असुरों के 

विनाश को और अच्छाई की पुन:स्थापना के लिए 

मैं युगों से इस धरा पर अवतार लेता रहा हूँ। 

                                --श्रीमद्भगवद्गीता -- श्री कृष्णा 

Srimadbhagwadgita Quotes in Hindi.

#1Quote.

जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए वह शत्रु के समान कार्य करता है.
           Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#2Quote.

सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नत्ता ना इस लोक में है और ना ही कही और.
               Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#3Quote.

मन की गतिविधियों, होश ,श्वास, और भावनाओं के माध्यम से भगवान की शक्ति सदैव तुम्हारे साथ है; और लगातार तुम्हे बस एक साधन की तरह प्रयोग कर के सभी कार्य कर रही है.
                Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#4Quote.

क्रोध से भ्रम पैदा होता है. भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है. जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है. जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन होता है.
               Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#5Quote.

ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक रूप में देखता है, वही सही मायने में देखता है.
                Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#6Quote.

मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है. जैसा वो विश्वास करता है वैसा वो बन जाता है.
                Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#7Quote.

आत्म-ज्ञान की तलवार से काटकर अपने ह्रदय से अज्ञान के संदेह को अलग कर दो अनुशाषित रहो.उठो। 
                Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#8Quote.

नर्क के तीन द्वार है : वासना, क्रोध, लालच।
                Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#9Quote.

पने अनिवार्य कार्य करो, क्योंकि वास्तव में काम करना निष्क्रियता से बेहतर है.
                Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#10Quote.

मन अशांत है और उसे नियंत्रित करना कठिन है, लेकिन अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है.
                 Srimadbhagwadgitaश्रीमद्भगवद्गीता 

#11Quote.

इस जीवन में ना कुछ खोता है ना व्यर्थ होता है.
              Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#12Quote.

लोग आपके अपमान के बारे में हमेशा बात करेंगे. सम्मानित व्यक्ति के लिए अपमान, मृत्यु से भी बदत्तर है.
               Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#13Quote.

निर्माण केवल पहले से मौजूद चीजों का प्रक्षेपण है.प्रबुद्ध व्यक्ति के लिए, गंदगी का ढेर, पत्थर, और सोना सभी समान है.
                 Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#15Quote.

उससे मत डरो जो वास्तविक नहीं है, ना कभी था ना कभी होगा. जो वास्तविक है, वो हमेशा था और उसे कभी नष्ट नहीं किया जा सकता।
                Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#16Quote.

bhagwad gita krishna photo
-----श्री कृष्णा----

व्यक्ति जो चाहे बन सकता है यदि वह विश्वास के साथ इच्छित वस्तु पर लगातार चिंतन करे.
                Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#17Quote.

हर व्यक्ति का विश्वास उसकी प्रकृति के अनुसार होता है. 
               Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#18Quote.

ज्ञानी व्यक्ति को कर्म के प्रतिफल की अपेक्षा कर रहे अज्ञानी व्यक्ति के दिमाग को अस्थिर नहीं करना चाहिए।
               Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#19Quote.

अप्राकृतिक कर्म बहुत तनाव पैदा करता है.
                Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#20Quote.

जन्म लेने वाले के लिए मृत्यु उतनी ही निश्चित है जितना की मृत होने वाले के लिए जन्म लेना. इसलिए जो अपरिहार्य है उस पर शोक मत करो.
              Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#21Quote.

सभी अच्छे काम छोड़ कर बस भगवान में पूर्ण रूप से समर्पित हो जाओ. मैं तुम्हे सभी पापों से मुक्त कर दूंगा. चिंता मत करो। 
              Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#22Quote.

मैं उन्हें ज्ञान देता हूँ जो सदा मुझसे जुड़े रहते है और जो मुझसे प्रेम करते है.
               Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#23Quote.

मै सभी प्राणियों को सामान रूप से देखता हूँ; ना कोई मुझसे कम प्रिय है ना अधिक. लेकिन जो मेरी प्रेम पूर्वक आराधना करते है वो मेरे भीतर रहते है और मैं उनके जीवन में आता हूँ.
              Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#24Quote.

किसी और का काम पूर्णता से करने से कहीं ज्यादा अच्छा है की अपना काम करे, भले ही उसे अपूर्णता से करना पड़े.
              Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#25Quote.

मेरी कृपा से कोई सभी कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए भी बस मेरी शरण में आकर अनंत अविनाशी को प्राप्त करता है.
               Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#26Quote.

प्रबुद्ध व्यक्ति सिवाय ईश्वर के किसी और निर्भर नहीं करता. 
              Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#27Quote.

हे अर्जुन, केवल भाग्यशाली योद्धा ही ऐसा युद्ध लड़ने का अवसर पाते है.
               Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#28Quote.

बुद्धिमान व्यक्ति कामुक सुख में आनंद नहीं लेता।
            Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#29Quote.

भगवान प्रत्येक वस्तु में है और सबके ऊपर भी.
          Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#30Quote.

मैं धरती की मधुर सुगंध हूँ. मैं अग्नि की ऊष्मा हूँ, सभी जीवित प्राणियों का जीवन और सन्यासियों का आत्मसंयम हूँ.
           Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#31Quote.

तुम उसके लिए शोक करते हो जो शोक करने के योग्य नहीं है, और फिर भी ज्ञान की बाते करते हो. बुद्धिमान व्यक्ति ना जीवित और ना ही मृत व्यक्ति के लिए शोक करते है.
         Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#32Quote.

जो कार्य में निष्क्रियता और निष्क्रियता में कार्य देखता है वह एक बुद्धिमान व्यक्ति है.
        Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#33Quote.

आपके सार्वलौकिक रूप का मुझे न प्रारंभ न मध्य न अंत दिखाई दे रहा है.
        Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#34Quote.

वह जो वास्तविक में मेरे उत्कृष्ट जन्म और गतिविधियों को समझता है, वह शरीर त्यागने के बाद पुनः जन्म नहीं लेता और मेरे धाम को प्राप्त करता है.
       Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#35Quote.

कर्म मुझे बांधता नहीं, क्योंकि कर्म के प्रतिफल की कोई इच्छा नहीं।
     Srimadbhagwadgita श्रीमासभागवद्गीता 

#37Quote.

हे अर्जुन ! हम दोनों ने कई जन्म लिए है. मुझे याद है, लेकिन तुम्हे नहीं।
         Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#38Quote.

कर्म योग वास्तव में एक परम रहस्य है.
         Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#39Quote.

अपने परम भक्तों, जो हमेशा मेरा स्मरण या एक-चित मन से मेरा पूजन करते है, मैं व्यक्तिगत रूप से उनके कल्याण का उतरदायित्व लेता हूँ.
        Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#40Quote.

बुद्धिमान व्यक्ति को समाज कल्याण के लिए बिना आसक्ति के काम करना चाहिए.
        Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#41Quote.

कर्म उसे नहीं बांधता जिसने काम का त्याग कर दिया।
       Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

#42Quote.

यद्यपि मैं इस तंत्र का रचयिता हूँ, लेकिन सभी को यह ज्ञात होना चाहिए की मैं कुछ नहीं करता और मैं अनंत हूँ.
      Srimadbhagwadgita श्रीमद्भगवद्गीता 

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